Monday, 11 June 2018

PADMAN ;A Movie to Watch !!


हमेशा से समाज के लिए कुछ करना चाहती थी परंतु नियति और ईश्वर ने इसके लिए कोई ठोस मौका नही दिया खुद की तस्सली के लिए मैंने इसकी शुरुआत दिल्ली में पढ़ाई के साथ एक एनजीओ जॉइन करके की। जिसने मुझे छोटे छोटे काम देने शुरू किए। उनमे से एक काम गांव की औरतों की स्वास्थ और हाईजीन पर क्लास लेना होता था। उनसे मिलकर ऐसी चीज़ें जानी जो काफी अचार्यजनक थी मासिक धर्म के समय गांव की औरते घास और गोबर के ओपले तक का इस्तेमाल करती थी। चूँकि मेरे लिए उस समय पैड वितरण के आलवा कोई चारा नही होता था तो मैंने उसके अलावा कुछ खास नही किया। कुछ समय बाद गूंज के साथ काम करने का मौका मिला तो चीज़ों को और अंदर तक जाकर समझा और उसी दिन से नैपकिंस ब्लैक पॉलिथीन में लेना बंद कर दिया परंतु आज तक कभी किसी पुरुष को इस विषय पर बात करते नही सुना।
सालों बाद ही सही परंतु बॉलीवुड ने समाज को एक पैड मैन दिया है। 




मूवी ने समाज के उस टॉपिक पर बात की जिसका नाम लेते वक्त लोगो को शर्म आती है। Mrs Funny bones ने खुद भले ही मेला जैसी मूवी में काम किया हो परंतु उन्होंने एक उम्दा मूवी को प्रोड्यूस किआ। अक्षय कुमार ने फिर से एक नेशनल अवार्ड वाला किरदार निभाया है। हो सकता है आपको मूवी हैवी और कुछ ज़्यादा ज्ञान देने वाली लगे पर आप मूवी में एक आदमी के संघर्ष के बाद की सफलता से दो पल के लिए प्रभावित ज़रूर होंगे। मूवी की लास्ट स्पीच आपको आपकी सोच बदलने के लिए प्रेरित करेगी। क्योकि सारी परेशानी इस सोच की है जिसको बदलने के लिए सदियों लग जाता हैं। आदमी मॉडर्न अपनी डिग्री और कपड़ो से नही अपितु सोच से बनता है।



Love is Listening,Giving and Freedom !!


खानाबदोश होने की वजह से आपको अक्सर घर बदलने पड़ते हैं और घर बदलने पर जो सबसे बड़ी चीज आपको ढूंढनी पड़ती है वो है काम करने वाली मेड। इस बात के दर्द को महिलाएं बेहतर समझ पाएंगी क्योकि एक दिन मेड के ना आने पर सबसे ज़्यादा रक्तचाप इन्हीं का बढ़ता है। आप बड़े नसीब वाले हैं अगर आपकी मेड अच्छी है। पिछले 2 सालों से मेरे घर में जो मेड काम कर रही हैं उनका नाम शुभी है। जब पहली बार मैं उनसे मिली तो मुझे उनकी दो चीज़ों ने प्रभावित किया एक तो इनका इतना प्यारा नाम और एक इनका हमेशा मुस्कुराता चेहरा।
नाम सुनकर मन में ख्याल आया कि इनके माता पिता ने इनका कितना प्यारा नाम रखा है और जीवन की मुश्किलों के बावजूद ये हमेशा खुश रहती हैं। मैने इससे ज़्यादा इनसे कुछ नही पूछा क्योकि मकानमालिक की सलाह पर ही मैं इनसे मिली थी। वैसे दीदी काम भी बहुत अच्छा करती है तो मैंने इनको बिना सोचे एक दिन में ही पक्का कर दिया
मैं बड़ा सौभाग्यशाली महसूस कर रही थी क्योकि मुझे कभी किसी को काम के लिए टोकना पसंद नही मुझे लगता है कि अगर आपका ये काम है तो आप इसे ज़िम्मेदारी से खुद करिये। पुरानी मेड को कभी कभी चाहते हुए भी बोलना पड़ता था।

अच्छा ! दीदी ने काम करना शुरू ही किआ था कि कुछ दिन मैंने ये जाना कि दीदी तो बंगाली भी है। ये जानकर मैं और खुश हुई कि चलो ये मुझे बंगला बोलना सिखा देंगी। पर जब उन्हें ये पता चला कि मैं जन्म से बंगाली नही तो उन्होंने मेरे पति की तरह ही मुझसे बंगला में बात करना ठीक नहीं समझा पर हां ! मेरे पति से वो धड़ा धड़ बंगला बोलती हैं खुद के लिए दुख पर इस बात से मन को तस्सली दी कि चलो घर में बंगाली फील तो आता है। दीदी को कुछ ही दिन हुए थे काम करते वक्त कि एक दिन किचन के स्लैब पर मेरे मंदिर के बर्तनों को देख कर वो बोली कि दीदी इन्हें हटाओ यहाँ से..मैं इन्हें नही धोती। मैंने पहली बार दीदी को काफी खड़ा बोलते सुना उसी क्षण उनको बड़े प्यार से कहा कि दीदी ये बर्तन मुझे धोने है और इन्हें मैंने अपने लिए रखा है। हमारे यहां जो पूजा करता है उसे ही मंदिर का सारा काम करना होता है। उन्होंने सुनकर जवाब दिया कि लोग उनको ये बर्तन छूने नही देते हैं। मैंने बात को खत्म किया और आफिस के लिए निकल पड़ी।

कुछ महीने बीते तो एक दिन वो मुझसे हिम्मत करके बोली कि आप रोज़ आफिस जाने से पहले ऑटो ढूंढने के लिए मेहनत करती हो तो आप मेरे पति जो कि एक ऑटो ड्राइवर हैं उन्ही को रख लो मैंने सोचा बाहर पैसा जाने से अच्छा है कि घर के व्यक्ति को पैसा मिले और समय के साथ भैया मेरे पर्मानेंट ड्राइवर बन गए। एक दिन ऐसे ही टाइमपास में मैंने भैया से उनका और उनके बच्चों का नाम पूछा और तभी जाना कि अरे दीदी तो मुस्लिम बंगाली हैं।उस समय तुरंत मेरे मन में ये बात आई कि अच्छा शायद दीदी ने इसलिए उन बर्तनों को देखकर ऐसी प्रतिक्रिया दी थी और उन्हें छूने तक से मना कर दिया था।पर इस बात ने दीदी के साथ मेरी बॉन्डिंग पर कोई प्रभाव नही डाला। मैंने उन्हें कभी ये एहसास नहीं होने दिया कि मैं उन्हें अपने परिवार से अलग मानती हूं। उन्हें इस का बात का एहसास कराया कि मैं उनपर भरोसा करती हूँ।।
आज घर में दो साल बाद कुछ ऐसा हुआ जिसको देखकर मुझे इतना अच्छा लगा कि मैं खुद को इस पोस्ट लिखने से रोक ना पाई। कल शिवरात्रि की पूजा के बाद दोबारा कुछ बर्तन किचन की स्लैब पर छूट गए शाम को आफिस से आकर देखा कि दीदी ने उन बर्तनों को धो दिया है और इतना साफ जैसे वो उनकी पूजा के बर्तन है। देखकर ये अच्छा लगा कि अब शुभी दीदी भी मुझ पर उतना ही भरोसा करती हैं जितना मैं उनपर। उन्हें भी पता है कि मैं उनके धुले बर्तनों को दोबारा गंगाजल से नही साफ करूँगी। आप इसे क्या कहेंगे ?? 

मैं इसे प्यार कहती हूँ जो एक बागीचे की तरह है जिसको आपको एक माली की तरह अपने प्यार और भरोसे से पालना पोसना होता है। इसमे आपको सामने वाले को वैसे ही अपनाना होता है जैसे वो हैं प्यार धैर्य और अंधा विश्वास माँगता है जिसमे सामने वाले की खुशी में आपको खुशी और उसके दुख में तकलीफ़ महसूस करनी होती है।

Love is Listening ! Love is Giving ! And Love is Freedom.



PS: ऊपर वाले ने सबको एक समान बनाया ,धर्म हमने बनाये | पहले अंग्रेज़ों ने और आज नेताओं ने पूरे देश को इसके गलत इस्तेमाल से अंदर तक खोखला कर दिया।


One SKY and Zillions Stars !!


बचपन में गर्मियों की छुट्टियों में हम हमेशा अपनी नानी के घर जाया करते थे। नानी का घर बहुत बड़ा था परंतु फिर भी सभी मासियों और मामा के परिवारों को मिलाकर 40 से 50 लोग हो जाया करते थे। हम सभी भाई बहन रात में कमरो में सोने की बजाय खुले आसमान के नीचे छत पर सोना पसंद करते थे जिसके लिए छत की जमीन पर एक कतार में गद्दे बिछा दिए जाते थे।सभी बच्चे एक दूसरे के अगल बगल सोना पसंद करते थे। पर मैं बचपन से अंधेरे में डरने की वजह से अपनी माँ के पास ही सोती थी।

माँ के पास सोने के तीन फायदे थे पहला कि माँ पूरी रात हाथ वाला पंखा करती थी और दूसरा कि उस भूतिया डरा देने वाले अंधेरे में नेचुरल कॉल आने पर सिर्फ वो ही मेरे साथ उठने की हिम्मत रखती थी। पर इन सब से बढ़कर था तीसरा ...माँ रात में सुलाने के लिए आसमान में टिमटिमा रहे लाखों तारो की कहानियां सुनाती थी। उनके के लिए Ursa Major सात भाई थे जो कि अपनी माँ को चरपाई पर बैठा कर घुमाने जा रहे हैं। जिनमे से चार भाइयों के कंधे पर चरपाई के पैर है और तीन पीछे समान उठा कर चल रहे हैं। चुकि इस कांस्टेलेशन की जगह आसमान में स्थिर नहीं थी तो मै माँ के उस दावे को सच मानती थी कि हां ! ये घूम ही तो रहे हैं। उनके के पास हर तारे से जुड़ी अनगिनत कहानियाँ थी। 

बड़े होने पर नानी के घर जाना कम हो गया और समय के साथ नानी के जाने के बाद बिल्कुल खत्म हो गया। बचपन अपने साथ कई चीज़े ले जाता है मेरे लिए वो खुला आसमान, तारे और उनसे जुड़ी कहानियां भी ले गया। वरना कॉफी का मग हाथ में लेकर तारों को घंटो देखना मेरी हॉबी हुआ करता था। शहरों में गगनचुंबी इमारतों के बीच आसमान टुकड़ो मे दिखता है और हमसे नाराज़ तारे सामने ही नहीं आना चाहते। 


आज 20 साल बाद जैसेलमेर के इस कैम्प मे रात में सोते वक्त वही नानी के घर वाला आसमान और टिमटिमा रहे तारों को देखा। इस अनुभव से आंखों और आत्मा को जो सुकून मिला उसको शब्दो में बयाँ कर पाना मुश्किल है। दिल बार बार बस ये कह रहा था कि काश मेरा लॉबस्टर( Timpu) यहां इस पल होता तो मैं उसे इन तारो से जुड़ी सारी कहानियां सुनाती जो कि उसकी विदेशी सीरीज़ से सौ गुना अच्छी है।







#Jaisalmer# Rajasthan# Kabila Camp# Night# Sky# Stars# Nostalgic.